प्रधानमंत्री से 85 प्रतिशत तस्वीरों वाली चेतावनी लागू करने की मांग
सीओएसएल कमेटी की रिर्पोट से हैरान विधवाएं जयपुर 29 मार्च। तंबाकू उत्पादों पर सचित्र चेतवानी को लेकर देश के विभिन्न भागों से चिकित्सक, स्वंयसेवी संस्थांए व तंबाकू पीड़ितों के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 85 प्रतिशत तस्वीरों वाली चेतावनी लागू करने की मांग कर रहें है। जब पूरा देश होली मना रहा था उस वक्त तंबाकू सेवन करने वाले पांच लोगों की विधवाओं और उनके परिवारों को अपने लोगों को खोने का दुख सहन करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। प्रदेश की विधवा महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा को पत्र लिखकर 1 अप्रैल 2016 से तंबाकू के पैकेटों पर बड़े आकार में तस्वीर वाली चेतावनी लागू करने की अपील की है। इसमें कर्नाटका के स्वास्थ्यमंत्री यू.टी.कादर ने भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नडडा को पत्र लिखा है।

पत्र में उन्होंने लिखा है, “हम आपको इसलिए यह पत्र लिख रहे हैं क्योंकि आप लाखों विधवा, अनाथ बनाने और माता-पिताओं को उनके बच्चों को छीनने वाली फैक्टरी तंबाकू उद्योग पर लगाम लगाने की आखिरी और एकमात्र आशा हैं। यह बहुत ही हास्यास्पद है कि भारत की अग्रणी सिगरेट निर्माताओं में सरकार एक बड़ा हितधारक है। इस खबर को पढ़कर महाराष्ट्र के पूर्व गृह और श्रम मंत्री की विधवा सुमित्रा पेढनेकर ने कहा “मैं यह जानकर स्तब्ध हूं कि संसदीय पैनल ने एक बार फिर 1 अप्रैल 2016 से तस्वीरों वाली चेतावनी को लागू करने पर रोक लगा दी है। मोदी जी मैं आपके सामने एक जीता जागता उदाहरण हूं जिसका परिवार तंबाकू के कारण बहुत कुछ भुगत चुका है।”  
रेणु (45)  निवासी दुर्गापुरा बताती है कि परिवार के पालन पोषण और समाज के बीच रहना दयनीय है। पति की कैंसर के चलते 2008 मौत हो गई और आज देानेां बच्चों को सरकारी स्कूल में शिक्षा तो मिल रही है पर उनको अपने पिता की कमी हमेशा रहती है। आठ पहले पति को कैंसर हो गया था जिस कारण अल्प समय में ही उनका देहांत हो गया ।
दुखी मन से वे बताती है कि गुटखों और सिगरेट का सेवन करते हुए आज किसी को भी देखती हूं तो शरीर कांप उठता है। अपने मोहल्ले में लोगों को समझाने का प्रयास भी करती हूं। इसलिए इस प्रकार के उत्पादों पर सचित्र चेतावनी का बड़ा होना जरुरी है। 
कोटा की 46 वर्षीय रेहाना बताती है कि पति इदरीश खान शादी के समय से ही तंबाकू का सेवन करते थे और 2010 में उनको मुंह में दर्द महसूस हुआ। इदरीश टैक्सी चलाने का काम करते थे । अस्पताल में जांच कराने पर पता चला कि उनको मुंह का कैंसर है और इसका आपरेशन कराना होगा। इसके बाद तो परिवार पर दुःखों का पहाड़ सा टूट गया। पति का इलाज कराने में मेरी शादी के गहने बेचने पड़े, तब जाकर उनका आपरेशन हुआ।  आपरेशन के बाद उनके चेहरे में विकृति का आ गई और खाने पीने में भी परेशानी शुरु हेा गई। कुछ समय तक तो उनका साथ रहा और वर्ष 2011 में ही उनका देंहात हो गया। तब से लेकर आज तक परिवार की स्थिति दयनीय है। तीन बच्चों की पढ़ाई लिखाई और घर का खर्च चलाने के लिए दिहाड़ी मजदूरी करनी पड रही है। इस स्थिति में हमारे रिश्तेदार व अन्य परिवारजन भी साथ छोड़ गए।
रेहाना बताती है कि इस तरह से किसी और को दुःखों का सामना करना पड़े इससे अच्छा है इन उत्पादों के उपर चित्रों का साइज बढ़ा देना चाहिए ताकि सभी तरह के लोगों को इससे होने वाले प्रभाव की जानकारी मिल सके। 
वायॅस ऑफ टोबेको विक्टिमस के पैटर्न व सवाई मान सिंह चिकित्सालय के सहायक प्राचार्य डा. पवन सिंघल बतातें है कि  देशभर में  प्रतिवर्ष करीब एक लाख से अधिक लोग मुंह के कैंसर से पीड़ित होते है जिनमें से 50 फीसदी की मौत बीमारी की पहचान होने के 12 माह के अंतराल में ही हो जाती है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान के अनुसार पुरुषों में 50 और स्त्रियों में 25 प्रतिशत कैंसर का कारण तंबाकू है। इनमें 90 प्रतिशत मुंह के कैंसर है। 
उन्होने बताया कि अधिकतर मरीजों में रोग की देरी से पहचान, अधूरा इलाज, अनुपयुक्त पुनर्वास सुविधाओं के शिकार है। लगभग 10 लाख भारतीय हर साल तंबाकू की वजह से मर जाते हैं जिसमें 72 हजार लोग राजस्थान के है। 
वे डॉक्टर जो प्रतिदिन तंबाकू के सेवन से हो रही मौतों के गवाह हैं इसके महत्व को किसी दूसरे व्यक्ति से अधिक साफ तरह से समझते हैं।

मई 2015 में अपने पति को खो चुकी निकू सिद्ध अभी तक अपने दुख पर काबू पाने की कोशिश कर ही है। उन्होंने कहा  ”मैं हैरान हूं कि संसदीय पैनल ने तंबाकू और कैंसर के बीच संबंध होने के प्रमाण पर शक किया है। यह बहुत ही घिनौना है कि तंबाकू लॉबी द्वारा अपने लाभ के लिए तंबाकू नियंत्रण की नीति को प्रभावित किया जा रहा है। दस रुपये के तंबाकू का एक पैकेट अमूल्य जीवन को नष्ट कर देता है।”  
वॉयस ऑफ तंबाकू विक्टिमस की निदेशक अशिमा सरीन ने कहा, “मैं निश्चिंत हूं कि हमारे प्रधानमंत्री इन विधवाओं की आवाज जरूर सुनेंगे। हकीकत तो ये है कि बिना जाने कि तंबाकू सेवन करने के नतीजे क्या होंगे, प्रतिदिन 5500 बच्चे तंबाकू का सेवन करते हैं। यहां आने का तो रास्ता है लेकिन इससे निकलने का रास्ता असंभव है। इन निर्दोष बच्चों के बीच तंबाकू के खिलाफ जागरूकता फैलाने का सबसे अच्छा तरीका तंबाकू पैकेटों को पूरी तरह चेतावनी से भर देना है।”     
सरकार को तंबाकू से नागरिकों के जीवन को बचाने के लिए अपने विवेक से निर्णय लेना चाहिए न कि ऐसी समिति की सिफारिशों के अनुसार।

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