जयपुर । प्रदेश सहित देश के 653 चिकित्सकों और मेडिकल सोसाइटीज के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि वह 1 अप्रैल 2016 से तंबाकू उत्पादों पर नई चित्रात्मक चेतावनियां लागू करें और लाखों मासूम महिलाओं को विधवा होने से और बच्चों को अनाथ होने से बचा लें। ये चिकित्सक तंबाकू के सेवन के कारण होने वाली मौत और बरपने वाले कहर के गवाह हैं।

विभिन्न विशेषज्ञताएं रखने वाले इन चिकित्सकों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वह ताकतवर तंबाकू लॉबी को सरकार के तंबाकू रोधी उपायों को नष्ट करने से रोकने के लिए आगे आएं। इस पत्र में प्रधानमंत्री को उनके द्वारा 31 मई 2014 को फेसबुक पर डाला गया उनका संदेश भी याद दिलाया गया। जिसमें लिखा था कि ‘‘ आइए, तंबाकू सेवन के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाने का संकल्प लें और भारत में तंबाकू सेवन घटाने की दिशा में काम करें। ’’ तंबाकू सिर्फ इसका सेवन करने वाले को ही प्रभावित नहीं करता है बल्कि यह आसपास के लोगों पर भी असर डालता है। आइए, तंबाकू को ना कहकर, स्वस्थ भारत की नींव रखें।

टाटा मेमोरियल अस्पताल के प्रोफेसर और सर्जन डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने कहा, “ प्रधानमंत्री का फेसबुक संदेश जन स्वास्थ्य के इस अहम मुद्दे के लिए उनकी निजी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रचुर मात्रा में चिकित्सीय साक्ष्यों ने यह साबित किया है कि तंबाकू एकमात्र ऐसा उपभोक्ता उत्पाद है, जो बीमारी, अपंगता और मौत देने के अलावा किसी अच्छे प्रयोग में नहीं आता। हमें इस बात की बहुत उम्मीद है कि वह देश के स्वास्थ्य के लिए सर्वश्रेष्ठ कदम उठाएंगे।”

सेखसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के निदेशक डॉ. पी. सी. गुप्ता ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अधीनस्थ कानून समिति चित्रात्मक चेतावनी के लिए अधिसूचना में देरी करने के लिए और इसे कमजोर करने के लिए दबाव बना रही है। वे तंबाकू से होने वाली तबाही के प्रति कम चिंतित दिखाई देते हैं लेकिन उन्हें तंबाकू उद्योग की खुशहाली की बेहद चिंता है।

वॉयस ऑफ तंबाकू विक्टिम्स कैंपेन के चीफ ऑफ ऑपरेशन्स संजय सेठ ने कहा कि “ये तंबाकू के खिलाफ कुछ बेहद स्तब्ध कर देने वाले तथ्य हैं, लगभग 10 लाख भारतीय हर साल तंबाकू की वजह से मर जाते हैं और लगभग 50 प्रतिशत कैंसरों की वजह तंबाकू होती है। यकीन है कि सरकार इन विचलित कर देने वाले आंकडों के बारे में जानती है और तंबाकू नियंत्रण को लेकर गंभीर है।”

उन्होने बताया कि वर्तमान में नेपाल में 40 प्रतिशत वर्तमान 1 अप्रेल से 85 प्रतिशत (2015)  भारत, 85ः (2015), पाकिस्तान, 85ः (2015),थाईलैंड, 85, ऑस्ट्रेलिया, 82 व  उरुग्वे, 80 प्रतिशत भाग पर सचित्र चेतावनी का प्रावधान है। 

याचिका पर हस्ताक्षर करते हुए चिकित्सकों ने कहा, “तंबाकू के प्रभावी नियंत्रण के कारण हमारी आजीविका को पहुंच सकने वाले नुकसान के बावजूद जन स्वास्थ्य के इस अहम मुद्दे को लेकर हम प्रतिबद्ध हैं। हम इसलिए शिकायत नहीं कर रहे क्योंकि देश सबसे पहले आता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अधीनस्थ कानून समिति की रिपोर्ट कुछ लाख के लाभ के चक्कर में अरबों लोगों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर रही है। ”

वायॅस ऑफ टोबेको विक्टिमस के पैटर्न व सवाई मान सिंह चिकित्सालय के सहायक प्राचार्य डा. पवन सिंघल ने कहा, “तंबाकू पैकेटों पर बडे आकार में चित्रात्मक चेतावनी युवाओं को इसका इस्तेमाल शुरू करने से रोकने वाली और मौजूदा प्रयोगकर्ताओं को इसकी लत छोडने के लिए प्रेरित करने वाली सबसे ज्यादा किफायती रणनीति है। एक ऐसे देश में, जहां प्रयोगकर्ताओं का एक बडा तबका कम पढा लिखा है, वहां प्रभावी चित्रात्मक चेतावनी का भारी महत्व है।” इसलिए तंबाकू उत्पादों पर  सचित्र चेतावनी इन खतरों को कम कर देती है।

वायसॅ ऑफ टोबेको विक्टिमस की प्रोजेक्ट डायरेक्टर आशिमा सरीन कहती है कि “यह स्थापित है कि बडी चित्रात्मक चेतावनियां तंबाकू सेवन में कमी लाती हैं। यही वजह है कि पूरी तंबाकू लॉबी अधिसूचना को नष्ट करने के लिए एकजुट हो गई है।” वंही दूसरी तरफ देश की वर्तमान स्थिति पर नजर डाले तो काफी भयावह है। वैश्विक व्यस्क तंबाकू सर्वेक्षण (गेट्स) के अनुसार  करीब 1.5 करोड़ लोग किसी ना किसी रुप में तंबाकू का सेवन करतें है और इनमें से प्रतिवर्ष करीब दस लाख से अधिक लोग तंबाकू से संबधित रोगों के कारण प्रतिवर्ष मृत्यु को प्राप्त होते है। यंहा पर महिला वर्ग में तंबाकू सेवन को प्रारंभ करने की औसत उम्र 14 वर्ष तथा पुरुषों में 17 वर्ष अंाकी गई है। 

सरीन बतातीं है कि इस प्रकार की सचित्र चेतावनियंा सिगरेट व अन्य ध्ूाम्रपान उत्पादों पर आने से इसका सेवन करने वालेां की संख्या में कमी आयेगी। इसके साथ ही शिक्षित,अशिक्षित व कामगार लेागों के द्वारा धूम्रपान सेवन करने में कमी आएगी। 

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